
रायपुर, 12 जून।छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा एक साथ जून, जुलाई और अगस्त महीने का राशन वितरण करने हेतु 1 जून से “चावल उत्सव” की शुरुआत की गई है। लेकिन इस बीच राशन वितरण प्रणाली में अचानक किए गए नियम बदलाव ने ग्रामीणों और हितग्राहियों को मुश्किल में डाल दिया है।नए नियमों के तहत अब राशन वितरण के लिए अंगूठा लगाना काफी नहीं है। हितग्राही को मोबाइल पर भेजे गए OTP (वन टाइम पासवर्ड) को दर्ज करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। राशन लेने की प्रक्रिया में तीन माह का चावल मिलने के कारण एक ही व्यक्ति को छह बार OTP प्राप्त करना पड़ रहा है, जिससे लोग भ्रम और परेशानी में पड़ रहे हैं।
OTP के बिना नहीं मिलेगा राशन
अब ऐसे हितग्राही जिनके पास आधार से लिंक मोबाइल नहीं है, वे राशन दुकान से राशन नहीं ले पा रहे हैं। उन्हें अपने घर या परिचितों को फोन कर OTP मंगाना पड़ रहा है। इससे वितरण प्रक्रिया में समय भी लग रहा है और राशन दुकानों में भीड़ बढ़ रही है।
ग्रामीण इलाकों में भारी असर
इस नई व्यवस्था से सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वालों को हो रही है। जहां मोबाइल नेटवर्क की दिक्कतें आम हैं, वहीं बहुत से लोगों को मोबाइल चलाना तक नहीं आता। ऐसे लोगों के लिए OTP आधारित सिस्टम एक बड़ी बाधा बन गया है।
लोक सेवा केंद्रों में भीड़
राशन न मिलने की आशंका से कई लोग अब अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने लोक सेवा केंद्रों में पहुंच रहे हैं। इन केंद्रों में अब भीड़ काफी बढ़ गई है और तकनीकी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
प्रशासन की चुप्पी, समाधान की राह अधूरी
नियम में बदलाव को लेकर अभी तक शासन या खाद्य विभाग की ओर से कोई विस्तृत सूचना या समाधान की पहल सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का सवाल है कि तकनीक आधारित इस व्यवस्था में उन लोगों की सुनवाई कौन करेगा जो डिजिटल माध्यम से जुड़ नहीं पाए हैं।
निष्कर्ष : सरकार द्वारा डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई पहल अपने स्थान पर उचित हो सकती है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जब तक डिजिटल सुविधा और जागरूकता गांव-गांव नहीं पहुंचेगी, तब तक इस तरह के बदलाव से लोगों को अधिक परेशानी ही उठानी पड़ेगी।







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