फूलों सी कोमल / सागर सी गहरी ,
होंठों की हँसी / खुशी का अहसास है माँ ।
इरादों में बुलंदी / माँथे पर चमक ,
जिगर में कामयाबी का आभाष है माँ ।
झट से हँसती पट से रोती ,
जीवन की हर खुशी में तेरा साथ है माँ ।
छू – छू कर काटती है सारी रात जो आँखों में ,
तपते बदन पर रखा हुआ तेरा हाथ है वो माँ ।
कभी बरामदा / कभी आँगन ,
कभी पूजाघर / कभी किचन ,
एक पल को भी नहीं रुकता तेरा पाँव है वो माँ ।
चौपाटी हो या हो माॅल / गार्डन हो या सिनेमाहाॅल ,
सेल्फीस में जो मुस्कुराए ,
खिलखिलाता चेहरा है वो माँ ।
दोस्त / प्रेमी / रिश्ते / नातेदार हैं बहुत ,
अजब सी मिठास है जिसमें रिश्ता कुछ खास है वो माँ ।
खयालों में / ख्वाबों में / धड़कनों में / साँसों में ,
जिधर देखूँ उधर तू है दिल के मेरे जज़बातों में ,
एक से बढ़कर एक अंदाज़ हैं जिसके ,
कोई और नहीं है वो ,वो है मेरी माँ ।

घनश्याम तिवारी
कोरबा ( छ.ग )







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