
स्वदेशी का बिगुल बजाकर जिसने चलाया चरखा
लाठी लेकर निकल पड़ा क्या धूप क्या बरखा
ऐसे महान बापू को करता देश नमन
जिसके प्रयास ने दिखाया आजादी का चमन
ऐसे महान बापू को करता देश नमन
शोषित को भी गले लगाया कहकर हरि का जन
देश प्रेम में बांट दिया जिसने तन मन धन
ऐसे महान बापू को करता देश नमन
यूपी-बिहार गुजरात या हो वर्धा
चलता रहना चाहिए बापू का चरखा
आजादी का प्रतीक है चरखा
स्वदेशी की शुरुआत है चरखा
जुलाहों का गीत है चरखा
हो धूप जाडा या बरखा
चलता रहना चाहिए बापू का चरखा
सूत कपास से मिल बनती है खादी
जिसके हर धागे में लिपटी है आजादी
भारत मां के आंचल की गर्माहट है खादी
जिसकी मेहनत ने दिलवाई आजादी
जिसने स्वदेश की खातिर खुद काटा चरखा
स्वच्छता अभियान चलाकर
सत्य अहिंसा की राह दिखाई
ऐसे महान पापो को करता देश नमन
विश्व पटल पर चमका है बनकर भारत की शान
कोई और नहीं बस एक नाम है गांधी गांधी गांधी
पूरा विश्व करता है जिसको एक साथ नमन
ऐसे महान बापू को ममता भी करें नमन
जिसके प्रयास ने दिखाया आजादी का चमन
ऐसे महान बापू को करता देश नमन
✍डॉ ममता श्रीवास्तवा,सरूनाथ






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