बड़े मंगल की परम्परा ????????


मंगलवार का दिन बजरंगबली हनुमान की पूजा करने का दिन है।मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से हमारे जीवन मे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है।बीमारियों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है तथा धन और समृद्धि आती है।लखनऊ मे बजरंगबली की पूजा अर्चना के लिए ज्येष्ठ मास मे एक विशेष त्यौहार मनाया जाता है “बड़ा मंगल”।प्रचलित कैलेंडर के अनुसार यह मई -जून मे पड़ता है।ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल कहते हैं।इस दिन पवनपुत्र हनुमानजी की पूजा की जाती है और हर तरफ भंडारे लगते हैं।

यह त्योहार लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक है। बड़ा मंगल’ का प्रारंभ लगभग 400 वर्ष पूर्व हुआ था।कहते हैं अलीगंज में हनुमान मंदिर का निर्माण नवाब सआदत अली खान ने अपनी मां आलिया बेगम की मन्‍नत पूरी होने पर करवाया था।मां की मन्नत से नवाब को पुत्र रत्‍न की प्राप्ति हुईl थी।मां आलिया बेगम के कहने पर नवाब ने मंदिर निर्माण करवाया।यह मंदिर लखनऊ के अलीगंज में स्थित है।मंदिर के गुंबद पर एक सितारा और एक अर्धचंद्र है।मंदिर मे हनुमान जी की भव्य मूर्ति स्थापित है।बड़े मंगल की परम्परा अलीगंज के हनुमान मंदिर से ही शुरू हुई।यहां पर मेला भी आयोजित किया जाता है।सभी भक्तों के लिए यह आस्था का केंद्र है।बड़े मंगल को यहां तथा पूरे लखनऊ मे भंडारे आयोजित किए जाते हैं।बड़ा मंगल का आयोजन हिंदू-मुस्लिम एकता का एक आदर्श उदाहरण है।मुस्लिम समुदाय भी भंडारे आयोजित करने मे सहयोग देता है। अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह ने उत्साह से इस परंपरा को जारी रखा।
अवध क्षेत्र का यह प्रमुख उत्सव है।कहते हैं कि लखनऊ के लोगों को बड़े मंगल पर घर पर खाना बनवाने की आवश्यकता नहीं रहती है। थोड़ी थोड़ी दूरी पर बहुत सारे भंडारे लगते हैं। पहले तो भंडारों में केवल पूड़ी सब्जी और बूंदी के प्रसाद का वितरण होता था परंतु अब कढ़ी चावल, छोला चावल, हलवा पूरी,फ्रूट चाट, फल, जूस, रूह अफजा, कचोडी, समोसा, तहरी और कहीं कहीं तो अब चाउमीन इत्यादि बच्चों की पसंद आने वाली चीजें का प्रसाद के रूप मे वितरण होता है। प्रसाद बांटने में लोगों की होड़ लगी रहती है कहीं-कहीं पर तो सौ सौ मीटर की दूरी पर भी भंडारे लगते हैं।भंडारा आयोजित करके सेवा के माध्यम से अपने आराध्य की सेवा करने का अवसर मिलता है।
बाहर से लखनऊ आने वालों को तो बड़े मंगल का दृश्य बहुत आश्चर्यजनक लगता है। “पहले आप, पहले आप” की तहजीब वाला लखनऊ उस दिन बिना किसी संकोच के प्रसाद पाने की होड़ मे रहता है। पर गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी कोरोना के कारण भंडारों का आयोजन नहीं हो पा रहा है। इस वर्ष का आखिरी बड़ा मंगल आज 22 जून को है। आप सभी को बड़े मंगल की हार्दिक मंगलकामनाएं।

राकेश श्रीवास्तव

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