
हंसते -हंसते देश पर अपनी जान न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारी शहीद -ए- आजम भगत सिंह की आज जयंती है। साथियों जैसा कि आप भी जानते हैं कि हम सब प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को क्रांतिकारी भगत सिंह के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके उनको याद करते हैं। देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी और अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को अपने साहस से झकझोर देने वाले भगत सिंह जी का जन्म 28 सितंबर 1960 को पंजाब प्रांत के रायपुर जिले के बगा में हुआ था। अपने साहस और इस प्रकार के विचार की बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है, इस प्रकार के विचार से क्रांतिकारी भगत सिंह ने नौजवानों के दिलों में आजादी का जुनून भरा था। जोकि आज भी भगत सिंह हम युवाओं के दिलों में उतने ही अपने विचारों और बलिदानों से झकझोर रहे हैं, पिछले वर्ष ही संत सिपाही मंच ने दिल्ली के एमपी ( संसद) क्लब में मुझे क्रांतिकारी भगत सिंह जयंती पर ‘ 2019 का भगत सिंह अवॉर्ड ‘से सम्मानित किया गया था। जहां देश के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक कार्य करने वालों को मेरे साथ सम्मानित किया गया था, जिससे हम सभी बहुत ही गौरवान्वित महसूस किए। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जब महात्मा गांधी जी ने 1922 में चौरीचौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन को खत्म करने की घोषणा किए तो उसी वक्त भगत सिंह का अहिंसावादी विचारधारा से मोह भंग हो गया था, फिर क्रांतिकारी भगत सिंह ने 1926 में देश की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना किए। दोस्त निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार यह दोनों क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण है, भगत सिंह कहते थे कि प्रेमी पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं और देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहा करते हैं।
दोस्त भगत सिंह केवल क्रांतिकारी गतिविधियों में ही भाग नहीं लेते थे बल्कि क्रांति का पूरा दर्शन गढ़ा, समाजवाद और रूसी क्रांति से प्रभावित थे, लेनिन और मार्क्स के विचारों का भी इनके जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा था। भगत सिंह ईश्वर और धर्म की अवधारणा में विश्वास नहीं करते थे, नास्तिक थे। यह दोस्त भगत सिंह के समाजवादी विचारों का ही प्रभाव था कि हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के नाम में सोशलिस्ट जुड़ा था जिसके बाद यह संगठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के नाम से जाना गया। भगत सिंह को पढ़ने का बहुत शौक था जेल में भी उनका अध्ययन जारी रहा,भगत सिंह राजनीति ,इतिहास ,अर्थशास्त्र , साहित्य से जुड़ी कई किताबें पढ़ी, आपको बता दें कि अपने अंतिम दिनों में भी भगत सिंह जी ने लिखना नहीं छोड़ा, उनकी जेल नोटबुक इस बात की गवाह है कि जेल में भी उनका चिंतन जारी रहा, अपनी फांसी से कुछ मिनट पहले तक वह लेनिन पर लिखी एक किताब पढ़ रहे थे।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि 23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ लाहौर षड्यंत्र के आरोप में अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर लटका दिया।
दोस्तों आज हमारे बीच क्रांतिकारी भगत सिंह तो नहीं है लेकिन उनकी विचारे और उनका दिखाया हुआ मार्गदर्शन हम सभी युवाओं में है। हम सभी को भगत सिंह के विचारों को अपने जीवन में उतारते हुए भारत मां के सेवा लिए हमेशा तैयार रहना है, जो भी वंचित ,शोषित और परेशान हमारे नजरों में दिखेगा उस के उत्थान के लिए अपने सामर्थ्य अनुसार हम प्रयास करेंगे। भगत सिंह आज भी हम सभी के दिलों और दिमाग में मौजूद हैं, पूरे विश्व के कल्याण के लिए जब भी हमारी जरूरत पड़े हम हमेशा तत्पर रहेंगे, आप सभी अपने क्रांतिकारी विचारों और जोश को इसी तरह से हमेशा ऊर्जावान बनाए रखें साथियों, पूरा विश्व हमारा है और हम पूरे विश्व का है वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास हम करेंगे।।
कवि विक्रम क्रांतिकारी ( विक्रम चौरसिया – चिंतक /पत्रकार/आईएएस मेंटर/ दिल्ली विश्वविद्यालय
लेखक सामाजिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं व वंचित तबकों के लिए आवाज उठाते रहते हैं – स्वरचित मौलिक व अप्रकाशित लेख।।






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