
जन्म एक व्यक्ति के जीवन की शुरुआत होती है, जब वह इस दुनिया में पैदा होता है। यह एक नया जीवनावधि की शुरुआत होती है और उसके लिए एक नया अवसर प्राप्त होता है। मृत्यु व्यक्ति के जीवन का अंत होता है। यह उसके शरीर की मृत्यु होती है और उसकी आत्मा शरीर से अलग हो जाती है।
इस परिवर्तनशील संसार में जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है। लेकिन जन्म उसी का सार्थक है जो अपने कार्यों से कुल , समाज और राष्ट्र को प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करता है। महाराजा भर्तृहरि के इन महा वाक्यों को चरितार्थ करता श्री श्याम बाबू गुप्ता जी का जीवन वास्तव में अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी है। उनका जीवन सत्य, संयम ,सेवा और सादगी का अद्भुत मिश्रण रहा है। उनके ही लिए स्वहित से पूर्व समाजहित और राष्ट्रहित रहा है। 10 अप्रैल 1941 को चिम्बराऊ (उत्तर प्रदेश) में श्री श्याम बाबू गुप्ता जी का जन्म एक संभ्रांत एवं शिक्षित परिवार में हुआ था।
वे विद्यार्थी जीवन में भी अत्यंत कुशाग्र थे।तत्कालीन समय में जबकि शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्ण पदक प्राप्त करना असाधारण उपलब्धि थी उन्होंने गणित विषय में मास्टर की न सिर्फ डिग्री हासिल की अपितु स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय भी दिया।
अपनी शिक्षा पूर्णकर सर्वप्रथम जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर मध्य प्रदेश में प्राध्यापक के रूप में चयनित हुए। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा का सफर जारी रखते हुए पेंड्रा में बी टी आई कॉलेज में प्राध्यापक के रूप में चयनित हुए ,तत्पश्चात करगी रोड कोटा बिलासपुर में डीपी हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएं दी। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा तो दी ही साथ ही वे सतत रूप से सामाजिक क्षेत्र में विभिन्न सेवा भावी कार्यों में भी सक्रिय रहे।
उनकी असाधारण प्रतिभा,ईमानदारी, सेवाभाव और समर्पण को देखते हुए उनका चयन जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में भी हुआ लेकिन कुछ पारिवारिक कारणों की वजह से उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया।
श्री श्याम बाबू गुप्ता जी ने शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपनी संतानों को भी उच्च शिक्षित किया। उनके परिवार में उनके दो पुत्र और दो पुत्री हैं। बड़े पुत्र डॉ संजय गुप्ता जो कि स्वयं में शिक्षा के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है। कोयलांचल कोरबा जिले में अपनी सेवाएं इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में विगत 7 वर्षों से दे रहे हैं, वहीं छोटे बेटे डॉक्टर अज्ञात गुप्ता एक प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। दो बेटी हैं डॉक्टर अलका गुप्ता और विद्युत गुप्ता। एक भरे पूरे संपन्न, सुखी और शिक्षित परिवार का वातावरण नसीब हुआ श्री श्याम बापू गुप्ता जी को। अपनी सेवाओं से निवृत होने के बाद श्री श्याम बाबू गुप्ता अपने छोटे बेटे डॉक्टर आजाद गुप्ता के साथ ग्वालियर में निवास रखते थे। उन्होंने अंतिम सांस 18 जनवरी 2025 को ग्वालियर में ली।
अपने पूरे जीवन काल में उनका मात्र एक ही उद्देश्य रहा सेवा शिक्षा और सामाजिक कार्य जमीन से जुड़े होने के कारण वे लोगों की समस्याओं को गहराई से समझते थे और हर संभव समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते थे। अत्यंत शालीन ,मृदुभाषी, शांत और विनम्र स्वभाव के धनी श्री श्याम बाबू गुप्ता अपने कार्यों एवं अपने स्वच्छ चरित्र के कारण सदैव लोगों के हृदय में वास करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके सफर को कभी नहीं भूलाया जा सकता। जहां-जहां उन्होंने अपनी सेवाएं दी शिक्षा के सफर को एक नए आयाम तक पहुंचाया ।आज भी लोगों के हृदय में और लोगों के जुबान पर श्री श्याम बाबू गुप्ता का नाम सर्वप्रथम आता है। वह एक अद्वितीय एवं अद्भुत शिक्षक थे और सभी के लिए प्रेरणा स्रोत थे और रहेंगे। उनके पढ़ने का जज्बा धैर्य और समर्पण वास्तव में अनुकरणीय और प्रशंसनीय थी। ऐसे अद्भुत शिक्षक और व्यक्तित्व की आत्मिक शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहेगा भगवान से यह प्रार्थना करते हैं। आपकी शिक्षा देने की परंपरा और शिक्षित करने की परंपरा सदैव आगे भी कई पीढ़ियां तक विद्यार्थियों को लाभान्वित करती रहेगी। आप हमेशा सबके हृदय में वास करेंगे आप हमेशा याद आते रहेंगे। स्वर्गीय श्याम बाबू गुप्ता औद्योगिक नगर कोरबा के शिक्षाविद एवं इंडस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ संजय गुप्ता के पिता श्री थे।
दैनिक लोक सदन स्वर्गीय श्याम बाबू गुप्ता की स्मृति को नमन करते हुए अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता है।







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