
कोरबा / विगत दिनों हिंदी के सिर्फ आलोचक डॉ मैनेजर पांडेय का देहावसान हो गया प्रगतिशील लेखक संघ की स्थानीय इकाई ने आज डॉक्टर मैनेजर पांडेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, प्रदेश अध्यक्ष लोक बाबू ने इस अवसर पर कहा कि डॉक्टर मैनेजर पांडेय हिंदी के आलोचकों में एक हैं उनकी किताबें उनका लेखन हिंदी का हमेशा मार्ग प्रशस्त करता रहेगा। उन्होंने एक संस्मरण याद करते हुए बताया कि डॉ मैनेजर पांडेय कुछ वर्ष पूर्व बिलासपुर एक व्याख्यान माला के तहत आए थे जहां उनसे मुलाकात हुई और उनके विद्वता को हम सभी ने महसूस किया था।
प्रगतिशील लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष लोक बाबू ने अपने श्रद्धांजलि वक्तव्य में कहा कि डॉ मैनेजर पांडे अध्यवसाय से जुड़े हुए थे सैकड़ों और सैकड़ों हिंदी के छात्र और लेखक उन्होंने अपने हाथों से गढ़े हैं।
इस अवसर पर डॉ टी महादेव राव ने अपने श्रद्धांजलि उद्बोधन में कहा – हिंदी की आलोचना और लेखन हमेशा डा. मैनेजर पांडेय की ऋणी रहेगी उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखी जो आलोचना का एक मानदंड हैं। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ टी महादेव राव ने आगे कहा कि स्वर्गीय मैनेजर पांडेय का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रलेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेशचंद्र रोहरा ने कहा डॉक्टर मैनेजर पांडेय भारतीय हिन्दी साहित्य के ऐसे शीर्षस्थ आलोचक थे जिन्होंने अपने लेखन से एक नई दिशा का निर्माण किया और आलोचना के नए प्रतिमान स्थापित किए।
इस श्रद्धांजलि सभा में शिवशंकर अग्रवाल, सनंददास दीवान एल्डरमैन, कमल सरविद्या, कुमार सुनील, केशव बारिया, कवि सावित्री शर्मा, मनोज मंगवानी, और डॉक्टर पांडेय को 2 मिनट मौन रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।








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