कृत्या इंटरनेशनल पोएट्री फेस्टिवल

कृत्या इंटरनेशनल पोएट्री फेस्टिवल 2020 का लाइव एवं वर्चुअल आयोजन 17 अगस्त से 26 अगस्त तक विदुषी कवियत्री रति सक्सेना के निर्देशन में हुआ। रति सक्सेना ने कार्यक्रम का संचालन अपने समर्पित सहयोगियों की सहायता से त्रिवेन्द्रम एवं जयपुर से किया।
कृत्या के बारे में और विस्तृत जानकारी दे रहे हैं लखनऊ से श्री राकेश श्रीवास्तव। यह कार्यक्रम की डायरेक्टर रति सक्सेना से हुई डिजिटल बातचीत पर आधारित है । श्री राकेश श्रीवास्तव की कविता” हिसाब अभी बाकी है” और “सुख की कीमत” का पाठ भी कृत्या 2020 में हुआ था।
कृत्या भारत की पहली पोएट्री वेब जनरल है, जिसका शुभारंभ जून 2005 में हुआ।इस 15 वर्ष की यात्रा में इस आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच पर अपनी अलग पहचान बना रखी है जिसके कारण आज उसमें बड़ी संख्या में विश्व प्रसिद्ध कवि भाग ले रहे हैं।
कृत्या के पोएट्री मूवमेंट जब शुरु हुआ तब भारतवर्ष में लिटरेरी फेस्टिवल ज्यादा प्रचलन में नहीं थे। इस बारे में रति सक्सेना ने बताया कि कृत्या के मुख्य उद्देश्यों में था प्राचीनतम कविता से नवीनतम अर्थात समकालीन कविता तक को एक मंच पर लाना। कविता को बच्चों,स्कूलों, कॉलेज तक ले जाना। कृत्या अन्य आयोजन की तरह मंच पर नहीं होता है । लोगों तक पहुंचने की इसकी इच्छा के कारण इसका आयोजन देश के विभिन्न भागों में हो चुका है।2006 में जम्मू -कश्मीर में हुआ, 2007 में केरला में, 2008 में पंजाब में 2009 में मैसूर फिर केरला, नागपुर, वर्धा इत्यादि स्थानों पर हुआ। अब यह केरल में ही होता है। रति जी रचनात्मकता को किताबों में कैद कर के नहीं रखना चाहती हैं। वह उसे क्रियात्मकता तक की तरफ ले जाना चाहती हैं। वह कविता को एक थेरेपी के रूप में भी देखती हैं। उनकी टीम के लोगों स्कूल,
कॉलेज,अनाथालय,ओल्ड एज होम,अस्पताल यहां तक की जेल में भी जाते हैं। उनका मानना है की कविता जिन के लिए लिखी गई है या जिनके सरोकार कविता में होते हैं, कविता उन तक पहुंचे। मंच पर होने वाली कविता ज्यादातर उसी मंच तक सीमित रहती है और कविता में जिसके प्रति चिंता रहती है वे उस से बेखबर रहते हैं।इस रूप में यह एक अभिनव प्रयोग है। उन तक पहुंचना कृत्या पोएट्री मूवमेंट के उद्देश्यों में से एक है।
इस आयोजन का एक उद्देश्य यह भी है की देश विदेश के कवि एक साथ आएं। वे लोग अनुवाद के माध्यम से एक दूसरे को पढ़ें तथा साथ ही साथ एक दूसरे को सुने भी। कई बार भाषा नहीं समझ में आती है पर उसकी ध्वनि और उसका प्रसारण अनेकों संदेश दे जाता है। कविता का अन्तर्निहित संगीत अपने आप सम्प्रेषण का कार्य कर देता है।
वेदों,काव्यशास्त्र तथा अन्य ग्रंथों की गहन अध्येता रति सक्सेना कृत्या के अर्थ के बारे में बताती हैं कि यह अथर्ववेद से लिया गया है जिसका अर्थ है शब्दे:शब्द। उन्होंने कहा कि कविता हमारे अंतर्मन को जगाती है और जादू का काम करती है। आप का कृत्या के प्रति समर्पण अद्भुत है। आप बिना किसी लाभ के लालच के तन मन धन से इसके संचालन में लगी हैं बल्कि कहती हैं कि उनको इससे ऊर्जा मिलती है।
वह कहती हैं
“मैं इस काल में कविता से भी दूर थी, कविता उत्सव की सोच कहाँ? लेकिन जून के अन्त में टहलते टहलते सपने सी चली आई, और मैंने भी उसका हमेशा की तरह आदर ही किया।”

इस वर्ष जब हम लोग कोरोनावायरस से गुजर रहे हैं, वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर उथल-पुथल मची हुई है, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, भावनात्मक सभी तरह के दबाव व्यक्तियों एवं समूह पर पड़ रहे हैं उस समय कविता के इतने बड़े उत्सव के बारे में सोचना,उसकी संकल्पना करना और उसको सफलतापूर्वक मूर्त रूप दे देना एक बहुत बड़ा कार्य है जिसे संकल्प की धनी रति सक्सेना और उनकी टीम ने सम्भव कर दिखाया है।
कृत्या का अन्तर्राष्टीय मंच पर अलग पहचान है। इस अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव में अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं के साथ-साथ हिन्दी भाषा के प्रख्यात कवि भी सहभागिता कर रहे हैं। कृत्या अंतर्राष्ट्रीय कविता महोत्सव 2020 में भारत में बोले जाने वाली भाषाओं जैसे मलयालम, कन्नड, बंगाली, संथाली, राजस्थानी, उड़िया, मराठी, हिन्दी आदि भाषाओं के कवियों ने भी हिस्सा लिया।यहां तक कि सांप पकडने वाले कबीले के एक कवि ने अपनी जनजातीय भाषा मे कविता पाठ किया। इसमें अमेरिका से एलीसिया पार्टनोव, इजिप्ट से अशरफ अबुल-यजीद अशरफ-डाली, यू. के. से मेन्ना एल्फिन, फ़्रांस से फ्रांसिस कोंबेस, रूस से वेदिम टेरेखिन, इटली से लेलो वोस, हंगरी से एडिना बर्ना, भारत से सुप्रसिद्ध अशोक वाजपेयी, के. सच्चिदानंदन, लीलाधर जगूड़ी, आकृति कुंतल, अजमल खान, मृदुला गर्ग, अग्नि शेखर,कृष्ण कल्पित एवं अनेकों अन्य कवि, सहित देश-विदेश के लगभग 150 से अधिक कवियों के कविता पाठ को देखा व सुना जा सकता है। कृत्या 2020 का शुभारंभ प्रसिद्ध कवि वरवरा राव की कविताओं से प्रेरित होकर लिखी गई कविता से किया गया
मैंने कहा था ना!
कवि सिंह नहीं
सिर्फ झरना होता है
फिर क्यों तुम मुझसे थर्रा उठे
झरना कोई बाँध तोड़ता नहीं
शहरों को डुबोया नहीं
झरना शहरों के पास
जंगलों की गाथा ले जाता
कार्यक्रम दस दिनों तक लाइव एवँ वर्चुअल चला।कार्यक्रम का समापन कृत्या के प्राचीन कविता को याद करने के उद्देश्य के अनुरूप राजस्थान के प्रसिद्ध महाकवि कन्हैया लाल सेठिया जी को उनके सौवें वर्ष पर याद करते हुए संपन्न हुआ। “धरती धोंरा दी” उनका प्रसिद्ध गीत है जो राजस्थान का बंदना गीत बन गया है, उसका गायन हुआ। यह गीत राजस्थान के ज़न मानस में बसा है और दूर दराज गाँवों तक गाया जाता है।

उत्सव की डायरेक्टर रति सक्सेना ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अपनी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मैं आभारी हूँ, उन सब कवियों की, जिन्होने कृत्या पर विश्वास दिखाया, और साथियों, एडिना, बबीता, चन्द्रमोहन, उषा राव, उमा, तस्नीम, बृजेश , सिद्धेश्वर, सुषमा और प्रदीप कुमार का, जिनका योगदान मुझे प्रेरणा देता रहता है।
आज आवश्यकता है कि ऐसे आयोजनों की संख्या और बढ़े और कविता ज़न ज़न तक पहुंचे और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का भी निर्वाह करे।
राकेश श्रीवास्तव
लखनऊ

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