प्रथम पूज्य गणराज जी,
विघ्न हरण महराज ।
नमन करूं कर जोर के,
सफल करो सब काज।।

उत्तराखंड की त्रासदी मे,
फंसे है जिनके प्राण ।
उनका संकट दूर करे,
संकट मोचन हनुमान ।।
घायल हैं जितने वंहा,
सबका हो उपचार ।
स्वास्थ्य लाभ पायें सभी,
सब की यही पुकार ।।
प्रकृति का रूप देख के,
होता यह विश्वास ।
मानव के वश मे नही,
है ज्यादा कुछ खास ।।
प्रकृति ने दिखला दिया,
रौद्र रूप फिर आज ।
फिर भी मानव चेतता,
ना करता शुभ काज।।
फटा ग्लेशियर शीत मे,
चकित हुए सब लोग ।
यह मानव की भूल है,
या फिर है संयोग ।।
सुंदरता धरती की है,
प्रकृति के ही संग ।
इसकी सुंदरता करें,
ना कोई बदरंग ।।
काम विकास के नाम पर,
करो न ऐसा काम ।
ब्यथित धरा भी चाहती,
सचमुच मे आराम ।।
बार बार की त्रासदी,
अरू जन धन का नाश ।
इससे बच सकते अगर,
समझ जो पाते काश ।।
कुदरत को मत छेडिये,
इसकी बड़ी है हाय ।।
इसके संग जीना सीखें,
“राम”कहे समझाय ।।
–रामसाय श्री वास “राम”—
किरारी (बाः)छत्तीसगढ
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