ईवीएम : भारत ई- लोकतंत्र में कितना परिवर्तित हो चुका है ?

लोकतंत्र की अवधारणा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर बल देती है ताकि सच्चे एवं ईमानदार यानी उपयुक्त जनप्रतिनिधियों का चयन हो सके, एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए साथियों कुछ मानदंडों का होना अनिवार्य होता है।
जैसे कि चुनाव को संपन्न करने के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण होना चाहिए, जो राजनीतिक तथा कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त हो । साथियों हमारे भारत के संविधान निर्माताओं ने भी इन मानदंडों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र निर्वाचन आयोग के गठन का प्रावधान किया, जो कि हमने देखा कि शुरुआती चरणों में निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष सटीक तथा पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया के लिए परंपरागत मतदान प्रणाली यानी कि बैलेट सिस्टम का प्रयोग किया गया जो काफी हद तक हमारे यहां सफल भी रहा।
लेकिन साथियों बाद में जब फर्जी मतदान तथा मतदान केंद्रों पर कब्जे की खबरें चर्चा में आने लगी तो निर्वाचन आयोग ने ईवीएम की शुरुआत किया। ईवीएम का सबसे पहले प्रयोग 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केंद्रों पर हुआ, फिर दोस्त वर्ष 2004 के आम चुनाव में देश के सभी मतदान केंद्रों पर 10.75 लाख ईवीएम के इस्तेमाल के साथ ही भारत ई-लोकतंत्र में परिवर्तित हो गया।
बिहार विधान सभा चुनाव में साथियों कोविड 19 से उपजी वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन किया जाएगा । वहीं दूसरी तरफ साथियों बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर पहली बार मॉडल-3 ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ईवीएम पूर्व के मॉडल से काफी उन्नत है और इसमें कोई भी बाहरी हस्तक्षेप संभव नहीं है।
बाहरी हस्तक्षेप पर काम करना बंद कर देगा ईवीएम
इस मशीन की कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट आपस में संवाद करने में सक्षम है। यदि बाहर से कोई कंट्रोल यूनिट या बैलेट यूनिट लगाई जाएगी तो इसके डिजिटल सिग्नेचर मैच नहीं होगा और सिस्टम काम करना बंद कर देगा। एम-3 ईवीएम में 24 बैलेट यूनिटें (एक बैलट यूनिट में 16 उम्मीदवार) जोड़ी जा सकती हैं। इससे पूर्व टाइप 2 ईवीएम में सिर्फ 64 उम्मीदवारों को ही लेने की क्षमता थी।
बिहार में ईवीएम मॉडल 2 से हुए हैं पिछले चुनाव
बिहार में पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव 2019 ईवीएम के मॉडल 2 से कराए गए थे। एक तो इसका सॉफ्टवेयर पुराना हो चुका है। दूसरा इसमें तकनीकी गड़बड़ी जल्द ठीक होनी मुश्किल होती थी। तकनीकी खराबी को जांच के बाद ही दुरुस्त किया जा सकता था। इसके अतिरिक्त मॉडल 2 ईवीएम में बैलेट यूनिट भी कम संख्या में जोड़े जा सकते थे।
आज साथियों हम देख रहे हैं कि लगभग सभी राजनैतिक दलों में धनबल, बाहुबल और चापलूसी जैसी विकृतियां बढ़ती जा रही है ऐसे में ईवीएम कितना स्वीकार और अस्वीकार है यह चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे भी बना रहेगा। क्योंकि हम सभी ने देखा कि भारत में एक लंबे समय तक बैलेट पेपर के जरिए मतदान हुए। इस दौर में हमने देखा कि राजनीतिक गलियारों में गुंडागर्दी, हिंसा, बूथ कब्जाने तथा बैलट बॉक्स में पहले ही बैलट पेपर भर दिए जाने जैसी घटनाएं सामने आती रहती थी। हमने यहां तक देखा कि कई राज्यो में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बाद भी बैलट बॉक्स लूटने की घटनाएं चर्चा में आती रही। ऐसे घटनाओं से जहां देश के लोकतंत्र का उपहास उड़ा वही साथियों जान- माल का भी भारी नुकसान हुआ।
ऐसे ही हालातों को देखते हुए ईवीएम को लाया गया जो बेहद सफल रहा है ,लेकिन कुछ राजनीतिक दलों द्वारा हालिया वर्षों में आम चुनावों – उपचुनावो में ईवीएम के विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं।
पहले जब बैलेट पेपर से चुनाव होते थे तब दोस्तों अधिकांशतः देखा जाता था कि चुनाव जीतने के लिए नेता लोग अपराधियों से सांठगांठ रखते थे और यही अपराधी बूथ कैपचरिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देते थे। इसी के परिणाम स्वरूप दोस्तों चुनाव जीतने के बाद भी अपराधियों पर नेताओं का हाथ बना रहता था जिससे कानून व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती थी।
हम आज ईवीएम के प्रयोग करके लाखों करोड़ों की संख्या में मतपत्रों की छपाई से बच जा रहे हैं, क्योंकि प्रत्येक अलग-अलग निर्वाचन के लिए एक मतपत्र के बजाय प्रत्येक मतदान केंद्र पर वैलेटिंग यूनिट पर केवल एक मतपत्र लगाया जाना अपेक्षित है। इसके साथ ही कागज, मुद्रण ,परिवहन, भंडारण एवं वितरण की लागत के रूप में भारी बचत हमारी हो रही हमारे देश की ईवीएम के कारण , एक अनुमान के मुताबिक ईवीएम मशीन के प्रयोग के कारण भारत में लोकसभा चुनाव में लगभग हम 10000 टन मत पत्र बचा सकते हैं। इससे हम पर्यावरण को भी संतुलित कर सकते हैं , साथ ही दोस्त ईवीएम को मत पेटियो की तुलना में आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं क्योंकि यह हल्का और पोटेबल भी होता है । कुछ लोग ईवीएम हैकिंग को लेकर सवाल करते रहते हैं। जैसे क्या ईवीएम में छेड़खानी की जा सकती है? दोस्त इसी को लेकर निर्वाचन आयोग स्पष्ट कई बार कर चुका है कि ईवीएम और उससे संबंधित प्रणालियां सुदृढ़ सुरक्षित और छेड़खानी मुक्त है। क्योंकि ईवीएम की कंट्रोल यूनिट और बैलट यूनिट केवल इंक्रिप्टेड या डायनॉमिकली कोडेड डाटा ही स्वीकार करता है, इसमें वायरलेस या किसी बाहरी हार्डवेयर पोर्ट के लिए कोई फ्रीक्वेंसी रिसीवर नहीं होती है इसलिए हार्डवेयर पोर्ट वायरलेस वाईफाई या ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करना असंभव है। इसके साथ ही प्रत्येक ईवीएम का एक सीरियल नंबर भी होता है जिससे निर्वाचन आयोग ईवीएम ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके अपने डेटाबेस से यह पता लगा सकता है कि कौन सी मशीन कहां पर अभी रखी गई है।
दोस्तों इससे पता चलता है कि ईवीएम तकनीक अपने आप में काफी उन्नत है लेकिन इसके बावजूद भी कई विकसित देशों में आज भी बैलेट पेपर की मदद से ही चुनाव कराया जाता है। ईवीएम मशीनों के माध्यम से चुनाव की सुरक्षा सटीकता विश्वासनीता और सत्यापन के बारे में गंभीर संदेह पूरे विश्व में समय-समय पर उढ़ते रहे हैं जैसे कि इंग्लैंड फ्रांस जर्मनी नीदरलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने ईवीएम के उपयोग पर ही प्रतिबंध लगा दिया है। साथियों चुनाव में पारदर्शिता लोगों का संवैधानिक अधिकार होता है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने 14 अगस्त 2013 को अधिसूचना के जरिए चुनाव कराने संबंधी नियम 1961 में संशोधन किया। इससे आयोग को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ ही वीवीपीएटी के इस्तेमाल का भी अधिकार मिल गया। कोर्ट ने भारत के निर्वाचन आयोग को वीवीपीएटी प्रणाली की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ही ईवीएम को वीवीपीएटी से जुड़ने का निर्देश दिया। फिर निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए वीवीपीएटी प्रणाली को ईवीएम के साथ निर्वाचन क्षेत्रों में लागू किया गया। हमने अभी पिछले वर्ष ही संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में देखा कि सभी ईवीएम मशीनों के साथ वीवीपीएटी मशीनों का भी इस्तेमाल हुआ। साथियों लोकतंत्र की सुदृढ़ता के लिए जरूरी है कि चुना गया प्रतिनिधि साफ-सुथरे तरीके से चुना जाए इसके लिए भारत में ईवीएम एक अच्छा विकल्प साबित हो रहा है और आगे भी होता रहेगा। क्योंकि अब हम यह भी समझ चुके हैं कि प्रौद्योगिकी क्या-क्या कर सकती है और क्या नहीं कर सकती है, तो इसीलिए बहुत ही जरूरी है कि हम इससे उन लोगों को अवगत कराएं जो इससे अनभिज्ञ हैं अभी भी इसके साथ ही निर्वाचन आयोग को सावधानीपूर्वक पुनर्विचार भी हमेशा करते रहना चाहिए कि सुरक्षित और पारदर्शी मतदान कैसे और मजबूती से कराया जाए जो राष्ट्रीय मूल्य और आवश्यकताओ के अनुकूल भी हो, आप सभी से मेरा विनम्र निवेदन है कि आप जरूर वोट करने जाएं अगर कोई भी प्रत्याशी आपको पसंद नहीं आए तो नोटा का बटन ही आप दबा देना लेकिन मजबूत लोकतंत्र के लिए वोट जरूर कीजिएगा।।
कवि विक्रम क्रांतिकारी ( विक्रम चौरसिया – चिंतक/पत्रकार/आईएएस मेंटर/ दिल्ली विश्वविद्यालय 9069821319
लेखक सामाजिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं व वंचित तबकों के लिए आवाज उठाते रहते हैं – स्वरचित मौलिक व अप्रकाशित

  • Related Posts

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    कोरबा। ऊर्जा की नगरी कोरबा में इस बार होली केवल रंगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक आत्मीयता और जनसंवाद का भी बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शहर में जगह-जगह…

    Read more

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    कोरबा, 04 मार्च होली के त्यौहार के बीच शहर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब सिटी कोतवाली क्षेत्र के सीतामढ़ी इमलीडुग्गू इलाके में 4 से 5 नशेड़ी युवकों ने…

    Read more

    Comments are closed.

    You Missed

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    खरसिया के परासकोल में युवक के अंधे हत्या का खुलासा,आरोपी गिरफ्तार

    खरसिया के परासकोल में युवक के अंधे हत्या का खुलासा,आरोपी गिरफ्तार

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    Amarjeet Bhagat : छत्तीसगढ़ राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में घमासान, दिल्ली दरबार पहुंचे अमरजीत भगत

    Amarjeet Bhagat : छत्तीसगढ़ राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में घमासान, दिल्ली दरबार पहुंचे अमरजीत भगत
    error: Content is protected !!