इतिहास में 31 जनवरी


1561 – मुग़ल बादशाह अकबर के संरक्षक बैरम खां की गुजरात के पाटण में हत्या कर दी गई।

1599 -भारत में ब्रिटेन की पहली ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना हुई।  

1850 -चीन में ताए पींगहा नाम से सबसे बड़ा जनान्दोलन आरंभ हुआ। ताए पींगहा चीनी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ जनता का संकल्प होता है। यह जनान्दोलन ग्रामीणों की कठिनाइयों और समाज में फैली दरिद्रता का परिणाम था और यह दरिद्रता विदेशी साम्राज्यवाद और मंचू वंश की सरकार की अयोग्यता के चलते ख़तरनाक सीमा तक बढ़ गयी थी। यह जनान्दोलन मंचू सरकार का तख्ता पलटने के प्रयास में आरंभ हुआ।

1865 – अमेरिका में दासता उन्मूलन संबंधी 13वां संशोधन विधेयक स्वीकृत हुआ।

1915 – प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने रूस के खिलाफ ज़हरीली गैस का इस्तेमाल किया।

1958 -अमेरिका ने अपना पहला उपग्रह एक्सप्लोरर प्रथम सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।

1963 – मोर को भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया।

1985 – दलबदल निरोधक संबंधी 52वें संविधान संशोधन विधेयक को राज्यसभा ने भी मंजूरी दी।

1992 – 28 देशों द्वारा क्रोएशिया एवं स्लोवानिया को मान्यता; न्यूयार्क में सुरक्षा परिषद का पहला शिखर सम्मेलन।

1995 – इस्रायल एवं जार्डन के मध्य हुई शांति संधि के परिणामस्वरूप इस्रायल ने अधिकृत सीमावर्ती क्षेत्र जार्डन के सुपुर्द किया।

2000 – हवाला केस के सभी आरोपी बरी।

2007 – भारतीय स्टील कम्पनी टाटा, एंग्लो डच इस्पात कम्पनी कोरस के अधिग्रहण के बाद विश्व की पांचवीं बड़ी कम्पनी बनी।

2004- सुर सम्राज्ञी सुरैया का मुंबई में निधन।

1881-  अमेरिकी रसायनज्ञ   इरविंग लैंगम्यूर का जन्म हुआ, जिन्होंने ठोस और तरल दोनों पृष्ठ पर आणविक झिल्लियों पर किए। इस अध्ययन से कोलाइड तथा जैवरसायन में शोध के नए क्षेत्र खुले। उन्हें 1932 का रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भी मिला। (निधन-16 अगस्त 1957)

1841- अमेरिकी पहेली निर्माता  सैम्युअल लॉयड का जन्म हुआ जिन्होंने  गणित से सम्बन्धित पहेलियों और कई माथापच्चियों के निर्माण के लिए जाने जाते हैं। इनका सबसे मशहूर पज़ल 14-15 पज़ल था जो 1878 में बनाया गया था।(निधन-10 अप्रैल 1911)

1995- अमेरिकी गणितज्ञ  जॉर्ज रॉबर्ट स्टिबिट्ज का निधन हुआ जिन्होंने  कई लोगों द्वारा आधुनिक डिजिटल कम्प्यूटर के जनक के रूप में जाने जाते हैं। सन् 1937 में उन्होंने बेल लैबोरेटरी में रिले, क्षणप्रभा (फ्लैशलाइट) और धातु-पट्टी आदि पर आधारित एक डिजिटल उपकरण का निर्माण किया जिसे उन्होंने मॉडल के कहा।  (जन्म 30 अप्रैल 1904)

1920-  जर्मन वनस्पति विज्ञानी  विल्हेल्म फेफर का निधन हुआ जिन्होंने परासरणिक दाब (ऑस्मोटिक प्रेशर) पर किए गए उनके कार्यों ने पादप-शरीरक्रिया विज्ञान का अग्रणी बना दिया। वर्ष 1877 में इन्होंने परासरण के अध्ययन के लिए एक अद्र्धपारगम्य झिल्ली का निर्माण किया। (जन्म 9 मार्च 1945)।

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